​दुनिया की इस भीड़ में, मैं खुदको ढूंढता रहा |

मेने इसमें देखा, उसमे देखा, 

पर किसी में मिल न सका | 

बेवजाह माफ़ी मांगता रहा मैं

और उनमे भी खुदको ढूंढ़ता रहा 

पर मैं किसी में मिल न सका |


अजब घटना घाटी एक दिन 

बरसो बाद सच में बोला था |

राह झूठ की छोड़ कर 

सच के चाह में चल पड़ा था | 

जीत की उम्मीद में

मैं एक बार फिर लौट आया था |

उसी दिन मैं ने खुद को खुद में ही पाया था | 


स्पष्टीकरण : 
मैं हमेशा ही सोचता हूँ की कमबैक करने का मौका हमें ज़िन्दगी कभी न कभी जरूर देती है | बस हमारा काम है की हम उस मौके को जखड़ ले पकड़ ले और एक बार फिर लाइफ में कमबैक कर ले | जीत उसकी नहीं होती जो हमेशा एक राह पे चलता है कोई नयी चीज़ नहीं करता हमेशा जीतता है बल्कि उसकी होती है जो गिरकर भी उठता है और एक बार फिर से जंग इ जीत के लिए तैयार होता है |




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