पहले तो लोगों को धर्मो में बाँट डाला,
और फिर धर्मो को जातो में काट डाला।
मंदिर-मस्जिद के नाम पे दो धर्म भिड जाते हैं,
और कभी कभी दो जात वाले तो ऐन्वायी भिड जाते हैं।
आज कल धर्म पीये हुए बेवडे पाए जाते हैं,
जो तू-तू मैं-मैं में ही तलवारे निकल लाते हैं।
कभी अयोध्या, 
कभी कशी,
कभी कृष्णा जन्मभूमि पे,
और कभी कुछ नही मिला तो गलत फेमि पे,
बस लोगों को भिड़ाया जा रहा है,
तर्क कुछ नहीं है बस वोट बैंक बढाया जा रहा है।
मोहम्मद के नाम पे राम घसीटे जा रहें हैं, 
और राम के नाम पे मोहम्मद पीटे जा रहें हैं।
जिन्होंने रामायण कभी पढ़ी ही नही वो भी मंदिर चाहते हैं,
और अल्लाह का तो क्या ही बोलें, बेचारे के नाम पे कभी भी बम फोड़ दिए जाते हैं।
हर जगह भगवे बंदर और हरे सूवर पाए जाते हैं,
उनके लिए जो सेक्युलर है, वो
या तो नामर्द हैं,
या जयचंद,
या फिर काफ़िर करार दे दिए जाते हैं।




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